पदम् भूषण स्वामी कल्याण देव जी की 14वी पुण्य तिथि

Padam Vibhushan Swami Kalyan Dev Ji
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आज दिनांक 16/07/2017 को स्वामी कल्याणदेव स्मृति वाटिका, वसुंधरा (साहिबाबाद सब्जी मंडी के सामने) वीत राग पदम् भूषण स्वामी कल्याण देव जी महाराज की 14 वी पुण्य तिथि भगवान श्री विश्वकर्मा ज्ञानपीठ, धीमान ब्राह्मण समाज, जांगिड़ ब्राह्मण समाज, पांचाल ब्राह्मण समाज, टांक ब्राह्मण समाज, रामगढ़िया एवं नामधारी सिक्ख समाज द्वारा मनाई गयी | कार्यकर्म में समाज की महान विभूतियाँ सारदार जस्सा सिंह रामगढ़िया, संत राम सिंह, राम विसुथार, ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह धीमान आदि लगभग 30 विभूतियो का संग्रह हित कलेंडर भी लगाया गया जिससे समाज के लोगो को इनकी जानकारी मिले |

कार्यकर्म दोपहर 12:०० बजे प्रारम्भ हुआ! सर्व प्रथम भगवान श्री विश्वकर्मा जी तथा स्वामी कल्याणदेव जी की प्रतिमाओं के सामने दीप प्रज्वलन एवं माल्यापर्ण कर पुष्पांजलि अर्पित की गयी | कार्यकर्म के मुख्य अतिथि भारतीय जान संचार संस्थान के निदेशक एवं वरिष्ठ अतिथि पूर्वांचल विश्वविधालय, जौनपुर के उप कुलपति प्रो० पी० सी० पतंजलि, स्वामी कल्याणदेव जी के पौत्र श्री चंद्रपाल भरद्वाज एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता डा० परमेन्द्र जांगिड़ थे|

वक्ताओं द्वारा स्वामी कल्याणदेव जी के जीवन पर प्रकाश डाला गया, वे सरलता की प्रतिमूर्ति थे | मानव सेवा की भावना उनके अंदर बचपन से ही कूट कूट कर भरी थी | स्वामी कल्याणदेव जी का जन्म २१ जून, १८७६ को ग्राम कोताना, जनपद बागपत में हुआ था लेकिन मूल गांव मुण्डवर, जिला मुजफ्फरनगर था| 1890 में उन्होंने घर छोड़ कर संन्यास ले लिया था | उनके पौत्र श्री चंद्रपाल भरद्वाज ने बताया कि स्वामी जी जब 8-10 वर्ष के थे तो घर से बाल्टी, लोटे में पानी लेकर हल चला रहे किसानो को पानी पिलाया करते थे | इस प्रकार मानव सेवा उनमें जन्मजात थी | स्वामी जी ने शिक्षा तथा सामज सेवा क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया उन्होंने लगभग 300 संस्थाओं की स्थापना की जिनमे डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज, बालिका कॉलेज, महिला डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक आई० टी० आई०, गऊशाला तथा वृद्धाश्रम है | प्रशिद्ध तीर्थ स्थल शुक्रताल के विकास का श्रेय भी उन्ही को जाता है | वर्तमान में उनके उत्तराधिकारी एवं शिष्य उनके काम हो आगे बढ़ा रहे है तथा देहावासन के बाद भी लगभग 60 संस्थाएं उन्होंने विकसित की है |

अनेक वरिष्ठ राज नेता, आई० ऐ० एस०, उद्योग पति तथा समाजसेवी उनके शिष्य थे, उन्होंने महत्मा गाँधी जी के साथ भी कार्य किया | प्रथम प्रधानमंत्री प० जवाहरलाल नेहरू उनके बाद गुलजारी लाल नंदा, इंदिरा गाँधी, वी० पी० सिंह तथा महामहिम राष्ट्रपति ड़ा० शंकर लाल शर्मा, के० आर० नारायण तथा ज्ञानी जेल सिंह द्वारा उन्हें अनेक बार सम्मानित किया गया| स्वामी जो को राष्ट्रीय नैतिकता पुरष्कार, पदमश्री तथा पदम् भूषण से भी अलंकृत किया गया| 14 जुलाई, 2004 को यह महान आत्मा हमारा साथ छोड़कर ब्रह्मलीन हो गयी |

इस अवसर पर समाज सेवा, मानव सेवा, शिक्षा तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपर्ण कार्य करने वाले ड़ा० रामजीलाल जांगिड़, प्रो० पी० सी० पतंजिल, अजय भारद्वाज, राजू पांचाल, स्वामी भूमानन्द, बी० दी० शर्मा, ब्रजभूषण शर्मा, बिजेंद्र धीमान, यशपाल जांगिड़, प्रमोद धीमान, अजय धीमान, सुधीर शर्मा एवं कार्य के आयोजक आदित्य धीमान को सम्मानित किया गया.
कार्यकर्म में ड़ा० अजय भरद्वाज, श्री अजय शर्मा, श्री राम कुमार शर्मा, श्री नरेंद्र पांचाल, श्री ओ० पी० शर्मा, श्री इंद्रजीत शर्मा, श्री अशोक धीमान, श्रीमती बबीता धीमान, ड़ा० रविंद्र धीमान, रविंद्र पांचाल, अमरीश धीमान, महेश धीमान आदि गणमान्य लोग उपस्तिथ थे |

स्वामी जी का सपना था की भगवान श्री विश्वकर्मा जी के नाम पर एक विश्वद्यालय की स्थापना होनी चाहिए जिसके सभी तरह की शिक्षा दी जाये | अतः सर्व सम्मति से यह प्रस्ताव पास किया गया है कि उ० प्र० सरकार एवं केंद्र सरकार से भगवान श्री विश्वकर्मा के नाम पर एक बनारस हिन्दू विश्वद्यालय जैसे विश्वद्यालय के निर्माण की मांग की जाएगी |

अंत में प्रशाद वितरण किया गया तथा लगभग 4:00 बजे कार्यकर्म समाप्त हुआ | आयोजक आदित्य धीमान एवं अजय भरद्वाज द्वारा सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया तथा संकल्प लिया गया कि विश्वकर्मा समाज की महान विभूतियों की जयंती एवं पुण्य तिथि के कार्यकर्म भविष्य में भी किये जायेंगे |


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